'आ माय लेल की आनू?' — सर्वरक एहि एक सवाल पर पूरा टेबुल चुप भऽ गेल

दूटा बेटा, एकटा गर्लफ्रेंड आ एकटा मासूम सवाल — आब लोक दू खेमा मे बँटल छथि जे सत्य बाजी वा हँसि कऽ टारि दी।
Maithili

'आ माय लेल की आनू?' — सर्वरक एहि एक सवाल पर पूरा टेबुल चुप भऽ गेल · Avonetics

🎧 Podcast episode
Coming soon — कामिनी & विद्यापति are taking this one into the studio.
Sponsored
Volicci custom graphic tees, hoodies & die-cut stickers, a fresh original design every day. Learn more →

एकटा साधारण दिन, एकटा साधारण रेस्टोरेंट, आ एकटा सवाल जे केओ खराब मोन सँ नै पुछने छल। मुदा ओहि सवाल टेबुल पर बैसल चारू गोटे केँ एक्के संग चुप करा देलक।\n\nकहानी सुनाबय वाली महिला कहैत छथि जे ओ बच्चा-विहीन छथि। हुनकर कोनो संतान नै छनि। मुदा ओ एकटा आदमी सँ प्रेम करैत छथि जिनका दूटा बेटा छनि — एगारह वर्षक आ नौ वर्षक।\n\nकागज पर ओ अखनि किछु नै छथि। न सौतेली माय, न अभिभावक। ओ अपने कहैत छथि — 'हम बस हुनकर पापाक गर्लफ्रेंड छी।'\n\nमुदा दुनिया एतेक बारीक फर्क नै करैत अछि। जखन ओ चारू गोटे एक्के संग बाहर निकलैत छथि, लोक एकटा तैयार तस्वीर देखैत अछि — बाप, माय, दूटा बेटा।\n\nपछिला बेर ओ सभ पर्किन्स मे बैसल रहथि। सर्वर एक-एक कऽ ऑर्डर लेलनि। बच्चा सभक ऑर्डर भेल, पापाक भेल, आ फेर ओ मुस्किया कऽ पुछलनि — 'आ माय लेल की आनू?'\n\nओ ऑर्डर दऽ देलनि। आवाज सामान्य राखि लेलनि। मुदा ओहि आधा सेकेंड मे ओ देखि लेलनि जे दुनू बेटा नजरि नीचाँ कऽ लेलक।\n\n'हमरा बुझा गेल जे ओ सभ थोड़ेक असहज भऽ गेल,' ओ कहैत छथि।\n\nहुनकर उलझन तीन दिस सँ अछि। बच्चा सभक माय जीबैत छथि आ हुनकर जगह छनि — ओ नै चाहैत छथि जे हुनकर चुप्पी ओहि जगह पर छाया करय। बच्चा सभक अपन भावना अछि। आ ओ अनचिन्हार सर्वर, जे बस भला मोन सँ पुछने छलाह, तिनको ओ शर्मिंदा नै करय चाहैत छथि।\n\nतँ सवाल इएह अछि — की बाजि देबाक चाही, 'हम माय नै छी, हुनकर पापाक गर्लफ्रेंड छी'? वा चुपचाप ऑर्डर दऽ कऽ आगू बढ़ि जेनाइ बेसी दयालु बात थिक?\n\nजखन ई कहानी बाहर आयल, एहन परिवार सभ सँ जवाब उमड़ि पड़ल — आ लोक साफ-साफ दू खेमा मे बँटि गेलाह।\n\nपहिल खेमा कहैत अछि — बहऽ दिअ। 'जकरा सँ फेर कहियो भेंट नै होयत, ओकरा लेल परिवारक नक्शा बनेबाक कोनो जरूरत नै,' एक टिप्पणीकार लिखलनि। 'असहज होइत अछि? हँ। ओतेक मायने रखैत अछि? नै।'\n\nदोसर लिखलनि जे ओ सभ पूरा छुट्टी मे बेर-बेर एकर सामना केलनि आ हर बेर बस आगू बढ़ि गेलाह — 'हम असहज बातचीत नै चाहैत छी, आ बच्चा सभ केँ त ध्यानो नै जाइत छनि।' मजाक ई जे ओ आ हुनकर पति दुनू लाल केश आ छाईं वला छथि, आ बच्चा सभ अपन मायक नाँइ साँवर आ करिया केश वला।\n\nएक गोटे बतौलनि जे ओ बस नरमी सँ कहि दैत छथि 'ओह, हम त नै छी...' आ बात ओतहि छोड़ि दैत छथि। आर एक गोटे कहलनि जे ओ हँसि कऽ टारि दैत छथि, मुदा मोन-मोन कहऽ चाहैत छथि — 'हँ, हम माय त छी, मुदा अपन कुकुर सभक।'\n\nसभ सँ हल्लुक जवाब एक टिप्पणीकारक छल — 'वाह, अहाँ हमरा हुनकर माय बुझलहुँ! हमरा लेल क्वेसाडिया अनू।'\n\nमुदा दोसर खेमा एतेक आसानी सँ नै मानैत अछि।\n\nओहि दिसक सभ सँ धारदार बात दू टा वाक्य मे आयल — 'हम लोक केँ कहि दैत छी जे हम डैन छी। डैड नै।' न भाषण, न झगड़ा। बस अपन नाम।\n\nएक गोटे मानलनि जे हुनकर सौतेला बच्चा असहज बातचीत सँ बचबाक लेल बनल रहनाइ पसिन्न करैत छल — मुदा दोसर लोक ओकरा समाधान नै, बचनाइ कहलनि।\n\nसभ सँ बेसी असर ओहि टिप्पणीक भेल जाहि मे एक गोटे बतौलनि जे ओ बेर-बेर असहज भेला पर बच्चा सभ सँ सोझे बैसि कऽ बात केलनि। ओ बुझौलनि जे लोक सभ हमर परिवारक बनावट नै बुझैत अछि, आ फेर पुछलनि — 'की अहाँ चाहैत छी जे हम लोक केँ ठीक करी?'\n\nबारह वर्षक पैघ बेटा कहलक जे ओकरा कोनो फर्क नै पड़ैत। मुदा नौ वर्षक छोट बेटा कहलक — 'हमहूँ काश अहाँ केँ माय कहि सकितहुँ।'\n\nमीठ बात। मुदा ओ महिला ई नै चाहैत छलीह, आ बच्चाक माय पहिनहि ओकरा समझा देने रहथिन जे ओकर माय एक्केटा छथि।\n\nएक टिप्पणीकार एहि दुनू खेमाक बीच एकटा रस्ता निकाललनि — 'सर्वर वला मामला मे बच्चा सभ केँ फर्क नै पड़ैत, तँ छोड़ि दैत छी। मुदा स्कूल मे वा संगीक माय-बापक सोझाँ हम पहिनहि साफ अपन परिचय दऽ दैत छी।'\n\nआ एक गोटे ओ बात कहलनि जे सभ सँ बेसी बेर दोहरायल — फैसला बच्चा सभ करथि। जँ ओ सभ स्वयं 'सौतेली माय' कहि दैत छथि, त बात ओतहि खत्म। 'एकरा पैघ मुद्दा बनेबाक कोनो जरूरत नै।'\n\nतँ असली उत्तर कोन थिक — मुस्कान आ चुप्पी, वा नाम आ स्पष्टता? आँगनक किलबिलक दुनू होस्ट एहि कहानी केँ आमने-सामने बैसि कऽ खोलताह, दुनू पक्षक तर्क लड़ौताह, आ अंत मे अपन साफ फैसला सुनौताह।

0:00
0:00
Link copied ✓