AI की भारी कीमत: डेटा सेंटरों के लिए छीनी जा रही ज़मीन, क्या आपकी बिजली का बिल भी बढ़ने वाला है?

तकनीक की अंधी दौड़ में आम नागरिकों के ज़मीनी अधिकार और पर्यावरण दांव पर, जानिए क्या है डेटा सेंटर का पूरा विवाद और एप्पल का नया सरप्राइज।
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AI की भारी कीमत: डेटा सेंटरों के लिए छीनी जा रही ज़मीन, क्या आपकी बिजली का बिल भी बढ़ने वाला है? · Avonetics

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दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का ढोल पीटा जा रहा है, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक डरावना सच छिपा है। टेक दिग्गज अपने AI मॉडल को चलाने के लिए विशाल डेटा सेंटर बना रहे हैं, लेकिन इन सेंटरों को चलाने के लिए जिस बिजली और ज़मीन की ज़रूरत है, उसकी भारी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है। बिजली कंपनियाँ 'एमिनेंट डोमेन' यानी ज़मीन अधिग्रहण के विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करके आम लोगों, किसानों और स्थानीय निवासियों की ज़मीनों पर कब्ज़ा कर रही हैं ताकि डेटा सेंटरों तक ट्रांसमिशन लाइनें बिछाई जा सकें।

हालिया सर्वेक्षणों और रिपोर्टों से पता चला है कि लगभग 70 प्रतिशत नागरिक अपने इलाकों में डेटा सेंटर बनाए जाने के सख्त खिलाफ हैं। लोगों का कहना है कि इन विशाल सर्वर फार्मों की वजह से स्थानीय इलाकों में बिजली के बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। इतना ही नहीं, सर्वरों को ठंडा रखने के लिए हर दिन लाखों लीटर पानी की खपत की जाती है, जिससे आसपास के इलाकों में जल स्तर तेजी से गिर रहा है। चौबीसों घंटे चलने वाली भारी मशीनों के शोर ने आसपास के निवासियों का जीना दुश्वार कर दिया है।

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इस पूरे मामले पर जन-आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, "सरकारी शक्तियों का इस्तेमाल आम जनता के भले के लिए होना चाहिए, न कि अरबों डॉलर कमाने वाली निजी टेक कंपनियों के फायदे के लिए। जब सार्वजनिक परिवहन के लिए ज़मीन माँगते हैं तो मना कर दिया जाता है, लेकिन सर्वरों के लिए हमारी ज़मीन तुरंत छीन ली जाती है।"

दूसरी ओर, टेक विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर AI की होड़ में बने रहने के लिए बुनियादी ढांचे का यह विस्तार बहुत ज़रूरी है। एक विशेषज्ञ ने तर्क दिया, "अगर हमें अगली पीढ़ी की तकनीक अपनानी है, तो पावर ग्रिड को मजबूत करना ही होगा। यह निवेश अंततः देश के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करता है।"

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इसी गहमागहमी के बीच, कंज्यूमर टेक की दुनिया से एक दिलचस्प खबर भी सामने आ रही है। ब्लूमबर्ग के प्रमुख विश्लेषक मार्क गुरमन के अनुसार, एप्पल अपनी प्रीमियम 'सिरेमिक एप्पल वॉच' को फिर से बाज़ार में उतारने की योजना बना रहा है। आखिरी बार 2019 में एप्पल वॉच सीरीज़ 5 के रूप में पेश की गई यह लग्जरी घड़ी इस साल के अंत तक फिर से देखने को मिल सकती है। एक तरफ जहाँ बुनियादी संसाधनों पर बहस छिड़ी है, वहीं दूसरी तरफ टेक कंपनियाँ अपने प्रीमियम यूज़र्स को लुभाने में जुटी हैं।

'फुल चार्ज' पॉडकास्ट के ताज़ा एपिसोड में होस्ट सचिन और दीप्ति ने इस पूरे मुद्दे की गहराई से पड़ताल की है और टेक कंपनियों के इस दोहरे रवैये की जमकर धज्जियाँ उड़ाई हैं।

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