मैकेनिक ने 500 रुपये की मामूली खराबी के लिए थमाया 35 हजार का बिल! पीड़ित कार मालिक ने खोली गैरेज स्कैम की पोल

मैकेनिक ने 500 रुपये की मामूली खराबी के लिए थमाया 35 हजार का बिल! पीड़ित कार मालिक ने खोली गैरेज स्कैम की पोल · Avonetics
राजधानी के व्यस्त रास्तों पर रोज़ाना गाड़ी चलाने वाले रोहित शर्मा ने जब अपनी पहली सेकेंड-हैंड सेडान कार खरीदी, तो उन्हें लगा कि उनका एक लंबा सपना पूरा हो गया है। कार देखने में बिल्कुल नई जैसी लग रही थी और ओडोमीटर पर केवल 38,000 किलोमीटर की रीडिंग दिख रही थी। लेकिन यह खुशी केवल दो हफ्तों की मेहमान थी।
अचानक एक दिन हाईवे पर चलते समय गाड़ी के डैशबोर्ड पर 'चेक इंजन' की लाइट जल उठी। रोहित पास के ही एक नामी लोकल गैरेज में गाड़ी लेकर पहुंचे। मैकेनिक ने कार का हुड खोला, कुछ देर तक औजारों से टिक-टिक की और फिर एक गंभीर चेहरा बनाकर बड़ा ऐलान कर दिया। मैकेनिक ने कहा कि गाड़ी का टर्बोचार्जर और ECU पूरी तरह जल चुका है और इसे तुरंत बदलना होगा, जिसका कुल खर्च लगभग 35,000 रुपये आएगा।
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रोहित को मैकेनिक के हाव-भाव पर कुछ शक हुआ। उन्होंने बिना काम करवाए गाड़ी को सीधे अधिकृत कंपनी के सर्विस सेंटर ले जाने का फैसला किया। वहां जब कार को कंप्यूटर डायग्नोस्टिक स्कैनर से जोड़ा गया, तो जो सच सामने आया उसने रोहित के होश उड़ा दिए।
सर्विस सेंटर के चीफ तकनीशियन ने बताया कि गाड़ी में टर्बोचार्जर या ECU की कोई समस्या थी ही नहीं। असल में एक छोटा सा ऑक्सीजन सेंसर वायर ढीला हो गया था, जिसे ठीक करने में मात्र 10 मिनट का समय लगा और कुल खर्च आया सिर्फ 500 रुपये। इतना ही नहीं, जब गाड़ी का डिजिटल हिस्ट्री ट्रैक किया गया तो पता चला कि यह कार असल में 1,40,000 किलोमीटर चल चुकी थी और इसके ओडोमीटर से छेड़छाड़ की गई थी।
इस घटना ने सोशल मीडिया और कार लवर्स के बीच एक तीखी बहस को जन्म दे दिया है। एक इंटरनेट यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकल गैरेज वाले अब सीधे-सादे कार मालिकों को लूटने का अड्डा बन चुके हैं और वे जानबूझकर गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स बदल देते हैं।
वहीं दूसरी तरफ, कुछ लोगों का तर्क है कि सभी मैकेनिक एक जैसे नहीं होते। एक अन्य व्यक्ति ने तर्क दिया कि अधिकृत सर्विस सेंटर का लेबर चार्ज इतना ज्यादा होता है कि आम आदमी के पास लोकल गैरेज में जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचता। समस्या मैकेनिकों की नहीं, बल्कि पुरानी कार बाज़ार में नियमों के सख्त न होने की है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि देश भर के लाखों ड्राइवरों की कहानी है जो ओडोमीटर फ्रॉड और गैरेज के फर्जी बिलों का शिकार बन रहे हैं।
इस घपले की पूरी परतें खोलने और इससे बचने की चटपटी रणनीतियों पर हमारे होस्ट्स 'रोड रश' के लेटेस्ट एपिसोड में तीखी बहस कर रहे हैं।