30 डॉलर में बिक रही है आपकी प्राइवेसी? 6 साल के बच्चों को भी ट्रैकर पहनाने की तैयारी!

नील्सन के पर्सनल ट्रैकिंग डिवाइस और सिलिकॉन वैली के 'टेक फ़ासीवाद' ने डिजिटल प्राइवेसी पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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30 डॉलर में बिक रही है आपकी प्राइवेसी? 6 साल के बच्चों को भी ट्रैकर पहनाने की तैयारी! · Avonetics

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आज के डिजिटल दौर में आपकी प्राइवेसी की कीमत क्या है? शायद कुछ लोगों के लिए यह हर महीने मिलने वाले 30 डॉलर यानी कुछ हज़ार रुपये ही हैं। रेटिंग्स एजेंसी नील्सन अब ऐसे पर्सनल ट्रैकर बाज़ार में ला रही है, जिन्हें 6 साल से बड़े बच्चों से लेकर घर के हर सदस्य को पहनना होगा।

यह डिवाइस एक घड़ी, बेल्ट क्लिप या गले के लैनयार्ड की तरह पहना जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस आपकी व्यक्तिगत बातचीत रिकॉर्ड नहीं करता, बल्कि मीडिया सामग्री में मौजूद विशेष सब-ऑडिबल ऑडियो टोन को पकड़ता है। हालांकि, जो लोग इसके शिकार हुए हैं, उनका अनुभव बेहद भयावह है।

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एक उपभोक्ता ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब नील्सन की टीम उनके घर टीवी सेटअप करने आई, तो वे कंप्यूटर, गेमिंग कंसोल और पूरे घर में माइक लगाने की मांग करने लगे। जब उन्होंने इनकार किया, तो कंपनी के प्रतिनिधि लगातार फोन करके दबाव बनाने लगे और इसे 'समाज सेवा' बताने लगे।

इस मामले ने इंटरनेट पर एक तीखी बहस छेड़ दी है। एक टिप्पणीकार ने कहा कि यह सिर्फ 30 डॉलर के बदले में आपके पूरे जीवन की जासूसी करने जैसा है, जबकि कंपनियां आपके डेटा को बेचकर अरबों कमाती हैं। वहीं दूसरी तरफ, कुछ लोगों का मानना है कि जब हम दिन-रात अपने साथ स्मार्टफोन रखते हैं और किचन में स्मार्ट स्पीकर लगाते हैं, तो इस स्वैच्छिक डिवाइस से इतना परहेज़ क्यों?

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यह विवाद यहीं खत्म नहीं होता। सिलिकॉन वैली के बढ़ते दबदबे और टेक कंपनियों की तानाशाही के खिलाफ अब कुछ निर्भीक पत्रकार भी मैदान में उतर आए हैं। उनका कहना है कि अगर हमने आज इन 'टेक फ़ासीवादियों' का विरोध नहीं किया, तो आने वाले समय में आम इंसान के पास अपनी कोई आज़ादी नहीं बचेगी।

क्या प्राइवेसी को पैसों के बदले बेचना सही है या यह हमारे अधिकारों पर सीधा हमला है? फुल चार्ज पॉडकास्ट के ताज़ा एपिसोड में श्वेता और सचिन ने इस पूरे विवाद पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए चर्चा की है।

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